🌿 कपास • Crop Calendar
कपास का फसल कैलेंडर
अप्रैल से सितंबर तक बुवाई-पूर्व उपचार, रोग पहचान, रोग प्रबंधन, सफेद मक्खी नियंत्रण और खेत की निगरानी — उपलब्ध दस्तावेज़ की जानकारी के आधार पर।
📅 महीनेवार रोग एवं प्रबंधन कैलेंडर
देशी कपास का यह फसल कैलेंडर फसल की प्रमुख अवस्थाओं के अनुसार आवश्यक कृषि कार्यों, रोगों की पहचान, रोकथाम एवं प्रबंधन को महीनेवार प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य किसानों को सही समय पर सही कृषि गतिविधि अपनाने, फसल की नियमित निगरानी करने तथा रोग एवं कीट प्रकोप से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायता प्रदान करना है।
01
अप्रैल
बुवाई से पहले • खेत की तैयारी
कपास — बीज एवं भूमि उपचार
- रोगग्रस्त खेतों में बुवाई से पहले 6 किग्रा जिंक सल्फेट (व्यावसायिक ग्रेड) प्रति बीघा की दर से मिट्टी में मिलाएं।
- बीजों को भिगोने से पहले कार्बेन्डाजिम 0.2% या कार्बोक्सिन 0.3% के घोल में उपचारित करें।
- वैकल्पिक रूप से ट्राइकोडर्मा हार्ज़ियानम या स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस जैव-एजेंट का 10 ग्राम/किग्रा बीज की दर से उपयोग करें।
- अधिक रोग प्रकोप वाले खेतों में ट्राइकोडर्मा हार्ज़ियानम को 50 किग्रा सड़ी-गली गोबर की खाद में मिलाकर 10–15 दिन छाया में नम रखें और खेत की तैयारी के समय मिट्टी में मिलाएं।
- पत्ती मरोड़ रोग वाले क्षेत्रों में रोगरोधी किस्मों को प्राथमिकता दें और खेत की मेड़ों/नहरों के किनारे खरपतवार नियंत्रित रखें।
🌱 मुख्य सलाह: बुवाई से पहले बीज एवं भूमि उपचार पर विशेष ध्यान दें।
02
मई
शुरुआती फसल • 30–35 दिन
जीवाणु झुलसा और पत्ती मरोड़ की निगरानी
- नरमा कपास में जीवाणु झुलसा के लक्षण बुवाई के लगभग 30–35 दिन बाद पत्तियों पर, विशेषकर किनारों पर, पानी जैसे गहरे हरे गोल धब्बों के रूप में दिखाई दे सकते हैं; बाद में ये भूरे-काले हो जाते हैं।
- यदि बुवाई के बाद इस अवधि में 20–30 मिमी वर्षा हो जाए तो रोग का प्रकोप बढ़ सकता है।
- बोने वाले बीजों को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 1 ग्राम या प्लांटोमाइसिन 10 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी के घोल से उपचारित करने की सलाह दी गई है।
- पत्ती मरोड़ रोग में सबसे पहले ऊपर की नई पत्तियों पर लक्षण दिखाई देते हैं; नसें मोटी और गहरी हो जाती हैं तथा पत्तियां ऊपर या कभी-कभी नीचे की ओर मुड़ती हैं।
- रोग सफेद मक्खी से फैलता है, इसलिए सफेद मक्खी का नियमित नियंत्रण और खेत के आसपास खरपतवार नियंत्रण जरूरी है।
🌱 मुख्य सलाह: नई पत्तियों की नियमित जांच करें और सफेद मक्खी की उपस्थिति को नजरअंदाज न करें।
03
जून
फसल बढ़वार • रोग की स्पष्ट पहचान
जड़ गलन एवं लीफ कर्ल नियंत्रण
- पहली सिंचाई के 7–10 दिन बाद जड़ गलन से मुरझाए पौधों को जड़ सहित निकालकर जला दें, ताकि रोग आगे न बढ़े।
- नरमा कपास में लीफ कर्ल के लक्षण जून में स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। रोगग्रस्त पौधे स्वस्थ पौधों की तुलना में छोटे रह जाते हैं और उनकी पत्तियां प्यालेनुमा/मुड़ी हुई दिखाई दे सकती हैं।
- सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग करें।
- खेत के चारों ओर तथा सड़क/नहर के किनारे पीली बूटी, भांग, भाखड़ी आदि खरपतवारों को समय-समय पर नष्ट करते रहें।
🌱 मुख्य सलाह: जड़ गलन के पौधे जल्दी हटाना और सफेद मक्खी को नियंत्रित रखना दोनों महत्वपूर्ण हैं।
04
जुलाई
अमेरिकन कपास • वर्षा अवधि
झुलसा रोग एवं लीफ कर्ल प्रबंधन
- अमेरिकन कपास में झुलसा रोग के दौरान पत्तियों की निचली सतह पर कोणीय पानी जैसे धब्बे बनते हैं, जो बाद में भूरे-काले हो जाते हैं।
- लक्षण दिखाई देने पर 100 लीटर पानी की दर से स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 5–10 ग्राम या प्लांटोमाइसिन 50–100 ग्राम का घोल छिड़काव करें।
- वैकल्पिक रूप से कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 250–300 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी की दर से उपयोग की जानकारी दस्तावेज़ में दी गई है।
- नरमा कपास में लीफ कर्ल के लक्षण स्पष्ट होने पर सफेद मक्खी नियंत्रण और आसपास के खरपतवारों की सफाई जारी रखें।
🌱 मुख्य सलाह: बरसात के दौरान पत्तियों पर रोग के धब्बों की नियमित निगरानी करें।
05
अगस्त
रोग प्रकोप • निरंतर निगरानी
झुलसा और पत्ती मरोड़ — नियंत्रण जारी रखें
- अमेरिकन कपास में झुलसा रोग के प्रकोप के अनुसार 100 लीटर पानी में अनुशंसित स्ट्रेप्टोसाइक्लिन/प्लांटोमाइसिन अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें।
- पत्ती मरोड़ रोग का प्रकोप चल रहा हो तो रोग फैलाने वाली सफेद मक्खियों के नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें।
- खेत और खेत के चारों ओर तथा सड़क या नहर के किनारे मौजूद खरपतवारों को समय-समय पर साफ करते रहें।
- रोगग्रस्त पौधों और आसपास के लक्षणों को लगातार मॉनिटर करें ताकि प्रकोप बढ़ने पर समय पर प्रबंधन किया जा सके।
🌱 मुख्य सलाह: अगस्त में रोग प्रकोप के अनुसार प्रबंधन दोहराने और खरपतवार नियंत्रण बनाए रखने पर जोर है।
06
सितंबर
अंतिम रोग निगरानी
पत्ती मरोड़ रोग — सफेद मक्खी नियंत्रण
- पत्ती मरोड़ (लीफ कर्ल) रोग का प्रकोप होने पर रोग फैलाने वाली सफेद मक्खियों के नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें।
- खेत के अंदर तथा खेत के आसपास मौजूद वैकल्पिक खरपतवार मेजबानों को हटाते रहें।
- सड़क या नहर के दोनों ओर उगने वाले खरपतवारों को भी नियमित रूप से साफ करें, क्योंकि ये रोग के प्रसार में सहायक हो सकते हैं।
🌱 मुख्य सलाह: फसल की अंतिम अवस्था तक सफेद मक्खी और लीफ कर्ल की निगरानी जारी रखें।