कृषि सूचना पोर्टल
‹
कृषि अनुसन्धान केन्द्र, श्रीगंगानगर कृषि एवं किसान कल्याण सूचना सेवा
🌾

सस्य क्रियाएं

🌿 सस्य क्रियाएं

फसल-चक्र, खेत का चुनाव, खेत की तैयारी, बुवाई, बीज उपचार एवं पौध संख्या प्रबंधन की महत्वपूर्ण जानकारी।

01

🌾 फसल-चक्र

अमेरिकन कपास के लिए निम्नलिखित फसल-चक्र अपनाए जा सकते हैं:

  • गेहूं – नरमा
  • ग्वार – पड़त – नरमा
  • चना – नरमा
  • पड़त – नरमा
02

🌱 खेत का चुनाव

कपास की अच्छी फसल के लिए खेत का सही चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है।

✓ मध्यम किस्म की भूमि उपयुक्त ✕ बिलकुल रेतीली भूमि उपयुक्त नहीं ✕ जल भराव वाले खेत ✕ क्षारीयता ग्रस्त खेत
⚠️ सावधानी: जल भराव और क्षारीयता से प्रभावित खेतों में कपास की बुवाई न करें।
03

🚜 खेत की तैयारी

पिछली फसल काटते ही खेत की तैयारी शुरू करें। गेहूं की कटाई के बाद खेत को अच्छी तरह तैयार करना आवश्यक है।

🚜 पहली जुताई एक गहरी जुताई
🌱 हल मिट्टी पलटने वाला (मोल्ड बोर्ड) हल
🔄 बाद की जुताई 2–3 जुताई कल्टीवेटर से
📌 महत्वपूर्ण: पिछली फसल की कटाई के तुरंत बाद खेत की तैयारी शुरू कर दें।
04

💧 पलेवा या रौणी

कपास की अच्छी स्थापना के लिए गहरी सिंचाई आवश्यक है।

💦 गहरी सिंचाई

गहरी सिंचाई करना आवश्यक है।

🌬️ बालू उड़ने वाले खेत: जिन खेतों में बालू उड़ने से पौधों के मरने की समस्या रहती है, वहां बिना जुताई किए डण्ठल छांटकर पलेवा करने से फसल का बचाव होता है।
05

🛡️ भूमि उपचार

दीमक प्रभावित खेतों में भूमि उपचार विशेष रूप से आवश्यक है।

🪲 दीमक प्रभावित खेत

पलेवा के बाद जुताई करने से पहले क्यूनालफॉस 4% चूर्ण 6 किग्रा प्रति बीघा की दर से मिलाएं।

✓ पलेवा के बाद ✓ जुताई से पहले ✓ दीमक प्रभावित खेत
06

📅 बुवाई का समय

🌱 सामान्य बुवाई 1 मई से 20 मई
🌾 बीकानेरी नरमा 15 अप्रैल से 15 मई
📌 बीकानेरी नरमा: बीकानेरी नरमा की बुवाई 15 अप्रैल से 15 मई तक की जा सकती है। मई माह के अंत तक भी बुवाई की जा सकती है।
07

🌱 बीज उपचार

01
रेशे हटाना

10 किग्रा बीज हेतु 1 लीटर व्यापारिक गंधक का तेजाब डालकर 1–2 मिनट लकड़ी से हिलाएं। फिर तुरन्त बहते पानी में धोकर तैरते हुए कच्चे बीज अलग कर लें।

02
गुलाबी लट रोकथाम

4 से 40 किग्रा बीज को 3 ग्राम एल्यूमिनियम फॉस्फाइड से कम से कम 24 घण्टे धूमित करें, या तेज धूप में 6 घण्टे तपायें।

03
रस चूसक कीट व पत्ती मरोड़ विषाणु

रेशे रहित बीज को इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यू.एस. (5 ग्राम) या थायोमिथोग्जाम 70 डब्ल्यू.एस. (4 ग्राम) प्रति किग्रा बीज से उपचारित करें।

04
जीवाणु अंगमारी (ब्लैक आर्म)

प्रति बीघा बीज को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 1 ग्राम या प्लांटोमाइसिन 10 ग्राम (100 पीपीएम) प्रति 1 लीटर पानी के घोल में 8–10 घण्टे भिगोयें। रेशे सहित बीज को 2 घण्टे से अधिक न भिगोयें।

05
जड़ गलन

सादा पानी में भिगोए बीज को छाया में सुखाकर ट्राइकोडर्मा हरजेनियम / स्यूडोमोनास फ्लूरोसेन्स 10 ग्राम/किग्रा या कार्बोक्सिन 70% WP (3 ग्राम) या कार्बेन्डाजिम 50% WP (2 ग्राम) प्रति किग्रा बीज से उपचारित करें।

📌 नोट: कीट व बीमारी दोनों के उपचार हेतु पहले फफूंदनाशी/एंटीबायोटिक, फिर कीटनाशी से उपचारित करें।
08

🌾 बीज की मात्रा एवं बुवाई

01
सामान्य नरमा

प्रमाणित बीज 4 किग्रा प्रति बीघा। बुवाई की गहराई 4–5 सेमी तथा कतार से कतार की दूरी 67 सेमी।

02
आर.एस. 875

प्रमाणित बीज 6 किग्रा प्रति बीघा। कतार से कतार की दूरी 60 सेमी।

03
राज. एच.एच. 16 (संकर)

बीज 1.0 किग्रा प्रति बीघा। डिबलिंग द्वारा बुवाई तथा दूरी 60 सेमी।

04
आर.एस. 2013 व आर.एस.टी. 9

कतार की दूरी 67.5 × 30 सेमी या 90 × 30 सेमी रखी जा सकती है।

09

✂️ विरलीकरण (थिनिंग)

पहली सिंचाई के समय पौधों की उचित दूरी रखने के लिए विरलीकरण करें।

🌱 सामान्य नरमा दूरी 30 सेमी
🌾 प्रति बीघा पौधे लगभग 12,000
🌱 आर.एस. 875 दूरी 20 सेमी
🌾 आर.एस. 875 पौधे लगभग 21,000/बीघा
🌱 राज. एच.एच. 16 दूरी 60 सेमी
🌾 राज. एच.एच. 16 पौधे लगभग 6,200/बीघा
📌 समय: विरलीकरण पहली सिंचाई के समय करें और पौधों की निर्धारित दूरी बनाए रखें।
← वापस श्रेणी पर जाएँ