देशी कपास की प्रमुख किस्में
राजस्थान में विकसित एवं खेती के लिए जारी/अधिसूचित प्रमुख देशी कपास की किस्मों और संकरों की विस्तृत जानकारी।
राजस्थान की प्रमुख देशी कपास किस्में
इस पृष्ठ में RG-8, RG-18, RAJDH-9 और RG-542 की उपलब्ध स्रोत सामग्री के अनुसार विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें विकास/संकरण, पौधे की विशेषताएं, फूल व टिण्डे, पकने की अवधि, उत्पादन, ओटाई, रेशा गुणवत्ता तथा रोग या अन्य विशेष सहनशीलता शामिल है।
1988
यह स्थानीय (Desi) कपास की व्यापक रूप से अनुकूलित और अधिक उत्पादन देने वाली किस्म है, जिसे G-1 × Cernum के संकरण से विकसित किया गया है। इसका पौधा छोटा और सिम्पोडियल प्रवृत्ति वाला होता है। पत्तियां गहरी खंडित और संकरी होती हैं। फूल हल्के पीले होते हैं तथा पंखुड़ियों की पीठ की ओर लाल धब्बे होते हैं। टिण्डे आयताकार (oblong) होते हैं। टिण्डे का औसत भार 3.0 ग्राम और ओटाई 40.2 प्रतिशत है। इसकी औसत रेशा लंबाई 16.3 मिमी है तथा इसका लिंट सर्जिकल कॉटन के लिए उपयुक्त है। यह 170–180 दिनों में पकती है और बीज कपास का उत्पादन 20–26 क्विंटल/हेक्टेयर है।
मुख्य विशेषताएं
2001
इस किस्म को राजस्थान राज्य में खेती के लिए जारी एवं अधिसूचित किया गया था (CVRC Notification No. 92, दिनांक 02-02-2001)। यह SC-75 × RG-2-1 के संकरण से विकसित हुई है। इसकी पौधे की ऊंचाई 130–140 सेमी है और इसमें एकसमान परिपक्वता होती है। इस किस्म में एक marker trait पाया जाता है जिसमें बैंगनी रंग, मध्यम आकार और 3–4 खंड वाली पत्तियां होती हैं। पंखुड़ियों का बाहरी किनारा गुलाबी होता है तथा आधार पर गहरा लाल धब्बा होता है, जिससे फूल गुलाबी दिखाई देता है। टिण्डे मध्यम आकार के होते हैं और उनका औसत भार 2.20 ग्राम है। ओटाई 38 प्रतिशत तथा औसत रेशा लंबाई 17.8 मिमी है। यह 160–170 दिनों में पकती है और औसत बीज कपास उत्पादन 24–26 क्विंटल/हेक्टेयर है। यह जड़ गलन (Root Rot) रोग के प्रति सहनशील है।
मुख्य विशेषताएं
2006
RAJDH-9 आनुवंशिक नर-बांझपन (genetically male sterility) पर आधारित देशी कपास का संकर है, जिसे राजस्थान राज्य में खेती के लिए जारी एवं अधिसूचित किया गया था (CVRC Notification No. 599, दिनांक 25-04-2006)। इसकी पौधे की ऊंचाई 140–145 सेमी है। इसकी पत्तियां अपेक्षाकृत चौड़ी और हरी होती हैं। फूल पीले रंग के होते हैं और पंखुड़ियों के अंदर की ओर लाल धब्बे होते हैं। टिण्डे आयताकार (oblong) आकार के होते हैं। इसकी ओटाई 39 प्रतिशत है। यह 160–170 दिनों में पकती है और औसत बीज कपास उत्पादन 26–27 क्विंटल/हेक्टेयर है।
मुख्य विशेषताएं
2013
इस किस्म को राजस्थान राज्य में खेती के लिए जारी एवं अधिसूचित किया गया था (Notification No. SO E 2817(E), दिनांक 19-09-2013)। यह RG-255 × PA-255 के संकरण से विकसित की गई है। इसकी पौधे की ऊंचाई 140–145 सेमी है। इसमें 3–4 मोनोपोडिया शाखाएं होती हैं। फूलों की पंखुड़ियां क्रीम रंग की होती हैं और पंखुड़ी की पीठ की ओर लाल धब्बा होता है। टिण्डे आयताकार (oblong) होते हैं और उनका सिरा नुकीला होता है। टिण्डे का औसत भार 3.0 ग्राम तथा ओटाई 35.9 प्रतिशत है। इसकी औसत रेशा लंबाई 23.2 मिमी है। यह 160–170 दिनों में पकती है और औसत बीज कपास उत्पादन 30 क्विंटल/हेक्टेयर है। यह किस्म टिण्डे फटने/बीज झड़ने (shattering) के प्रति सहनशील है।